मेरी रातें कितनी तनहा थी
दिन में कितने झमेले थे
ना बचपन के थे सँगी साथी
जो साथ कभी मेरे खेले थे

था उमँग नहीं कोई मन में
जब तुम आये मेरे जीवन में
हैं मधुर गीत अब सावन में
जब तुम आये मेरे जीवन में

तू बादलों से मेरे लिये हीं आयी है
इन्द्रधनुषी रँग साथ लायी है
बेरँग थी मेरी ज़िन्दगी तेरे बिना
मेरी तक़दीर बन गयी है ये तेरी हिना
खिले हर तरफ अब फुल मेरे गुलशन में
जब तुम आये मेरे जीवन में…..

तुझसे बातें करना, कितना अच्छा लगता है
हर लफ्ज़ तेरा मुझे , कितना सच्चा लगता है
मद भरी ये तेरी आँखें, झुकी झुकी सी रहती हैं
मेरी साँसे तेरे सीने में, धीमे धीमे चलती हैं
मेरी कस्तूरी, छिपी हुई तेरे तन में
जब तुम आये मेरे जीवन में…

जो चेहरा, रोज़ रहता था मेरे सपनो में
है आज कितना लुभा रहा मेरे अपनो में
तू ख़ज़ाना है मेरी तक़्दीर का
या कोई सच्ची गज़ल है मीर का
स्वर्ग की खुशबू, अब रहती मेरे मधुबन में
जब तुम आये मेरे जीवन में…

मेरी रातें कितनी तनहा थी
दिन में कितने झमेले थे
ना बचपन के थे सँगी साथी
जो साथ कभी मेरे खेले थे

था उमँग नहीं कोई मन में
जब तुम आये मेरे जीवन में
हैं मधुर गीत अब सावन में
जब तुम आये मेरे जीवन में

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sharma.nishu@gmail.com

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