उस पल भी तुझे समझता था
जब तू बोल न पाती थी
पँखड़ी से ये नाज़ुक लब
जब तू खोल न पाती थी
नाज़ुक सी तेरे वजूद का एहसास
उस पल भी दिल में धड़कता
जब तू अपने पालने में
ख़ुद डोल न पाती थी

तेरी मौजूदगी का
मासूम सा वो एहसास
उम्र भर की थकान
मिटा देता था
तेरे नाज़ुक लबों पे
खेलती मुस्कान का उजाला
गरदिश ए हालात के तमाम
शिकवे मिटा देता था

तेरे लबों से पापा का
वो लफ़्ज़ जिस पल सुना था
मेरी ज़ीस्त का हासिल
वो ही एक लम्हा था
मेरे सूने आँगन में
मेरे पहले प्यार की निशानी का
तू महकता गुलाब़ का पौधा था
देख के तुझे
लगता है मुझे
किसी पल तेरी माँ से
किया जो
लाखों का वो सौदा था

तेरे नन्हे-मुन्हे कदम जिस पल
अँजान राहों में बढ़े थे
निगाह में मेरी उस पल
अधूरे ख़्वाबों के न जाने
कितने दीये जगमगा उठे थे

आज तुझसे मीलों दूर बैठा
सोंचता हूँ मैं
कल जिसको ऊँगली थाम के
चलाता था मैं
आज वो मेरी नन्ही सी गुड़िया
मेरे काँधे तक आ पहुँची है
समय की उड़ान भी कितनी ऊँची है

वक़्त के इस दोराहे पे
बैठा गुमसुम सोँचता हुँ मैं
अभी तो कितना लम्बा सफ़र
तय करना है तुझे
न जाने कितनी अँजान राहों से
गुजरना है तुझे

गर कभी जो तू तनहा होगी
मेरी याद दिल में गर पिनहाँ होगी
जिस दम तू कोई ठोकर खाये
गर तू जो कभी तनहा हो जाये
अँजान राहों पे चलते चलते
गर जो कभी मँजिल खो जाये
बस एक बार कहना मुझ से
ये वादा है मेरा तुझ से
तेरी राहों को मँजिलों से
मिला दूँगा
तेरे अँधेरों में दीये
जला दूँगा

आज तुझ से दूर सही पर
तेरी इस सालगिरह पे
तू दिल के अौर भी पास है मेरे
तेरी यादों का कारवाँ साथ है मेरे

वो दिन कहाँ दूर है अब

तेरे सपनों का राजकुमार
सफेद घोड़े पर सवार
आयेगा
झीलों के उस पार तुझे
ले जायेगा
तेरे सँग सपनो का
एक संसार सजायेगा
तेरे कदमों के तले
आकाश के सितारे बिछायेगा
धीरे धीरे तेरे दिल से
अपने पापा के दिये नक़्श मिटायेगा
मेरी यादों के परदे
तेरी निगाह से हटायेगा

वो दिन कहाँ दूर है अब

फिर भी अपने पापा की
वो ही प्यारी गुड़िया रहेगी तू
बड़ी हो जाये कितनी भी तू चाहे
सदा मेरे बाजुओं में
यूँ हीं झूलेगी तू
तेरी माँ से जो किया मैं ने
उस सच्चे इश्क़ की निशानी है तू
और क्या कहुँ तुझे कि
मेरी सारी जिन्दगानी है तू

raise
sharma.nishu@gmail.com

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